रायपुर/नारायणपुर, 12 अगस्त 2026।
बस्तर की धरती पर बुधवार को एक ऐतिहासिक तस्वीर देखने को मिली। कभी नक्सल गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाले नारायणपुर से अब तिरंगा यात्रा निकली। हाथों में तिरंगा और दिल में राष्ट्रभक्ति का जज्बा लिए बड़ी संख्या में युवा, बच्चे और स्थानीय लोग इस यात्रा में शामिल हुए।
‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का शुभारंभ नारायणपुर जिला मुख्यालय के हायर सेकेंडरी स्कूल ग्राउंड से हुआ। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने बाइक पर तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व किया। क्षेत्र के विभिन्न समाज प्रमुखों ने यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
तिरंगे के साथ विकास का संदेश
यात्रा के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह यात्रा उन इलाकों से होकर गुजर रही है, जहां कभी नक्सली घटनाओं का असर रहा है। अब इन्हीं क्षेत्रों में तिरंगे के जरिए शांति, सुरक्षा और विकास का संदेश दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नारायणपुर को यात्रा की शुरुआत के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यह जिला लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा है। अब समय बदल चुका है और बस्तर के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
90 से ज्यादा गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगा
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी 2024 से बस्तर के कई दुर्गम गांवों में राष्ट्रीय पर्वों पर लगातार ध्वजारोहण किया जा रहा है। इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर संभाग के 90 से अधिक ऐसे गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा, जहां आजादी के बाद स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं लहराया गया था।
उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल राष्ट्र की पहचान नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की पहुंच का भी प्रतीक है।
‘पहले फरमान था काला झंडा लगाने का, अब हर घर में तिरंगा’
विजय शर्मा ने कहा कि पहले राष्ट्रीय पर्वों पर माओवादियों की ओर से ग्रामीणों को अपने घरों में काला झंडा लगाने का फरमान दिया जाता था। लेकिन आज परिस्थितियां बदल रही हैं और बस्तर के गांवों में तिरंगा सम्मान के साथ फहराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों के मनोबल और सुरक्षा बलों के साहस से क्षेत्र में बदलाव आया है। अब बस्तर की पहचान नक्सलवाद से नहीं, बल्कि विकास और अपनी संस्कृति से होगी।
शहीदों की मिट्टी भी होगी संरक्षित
वन मंत्री एवं नारायणपुर विधायक केदार कश्यप ने कहा कि जिन क्षेत्रों को कभी नक्सल गतिविधियों का केंद्र माना जाता था, उन्हीं इलाकों से आज तिरंगा यात्रा निकल रही है।
यात्रा के दौरान उन स्थानों की मिट्टी भी एकत्रित की जाएगी, जहां जवानों और नागरिकों ने देश और समाज की सुरक्षा के लिए शहादत दी। इस मिट्टी का उपयोग भविष्य में बनने वाले स्मारक में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद से बाहर निकलकर शांति, विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
🏍️ तीन दिन चलेगी बस्तर तिरंगा यात्रा
12 अगस्त से शुरू हुई यह यात्रा 14 अगस्त तक बस्तर के कई संवेदनशील और पूर्व माओवाद प्रभावित इलाकों से होकर गुजरेगी।
पहले दिन नारायणपुर से यात्रा मुंजमेटा, झारागांव, धौड़ाई, कन्हारगांव, कड़ेनार, बोदली, सातधार और बारसूर होते हुए दंतेवाड़ा पहुंची।
दूसरे दिन यात्रा दंतेवाड़ा से सुकमा और बीजापुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरेगी।
तीसरे दिन बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए यात्रा कर्रेगुट्टा पहाड़ी पहुंचेगी।
🇮🇳 कर्रेगुट्टा में फहराया जाएगा तिरंगा
यात्रा का अंतिम पड़ाव बीजापुर जिले की कर्रेगुट्टा पहाड़ी होगी। यहां 14 अगस्त को तिरंगा फहराकर यात्रा का समापन किया जाएगा।
यह वही बस्तर है, जहां कभी सुरक्षा को लेकर चुनौतियां थीं। लेकिन अब उसी बस्तर की सड़कों पर तिरंगा लेकर बाइक रैली निकल रही है और युवा पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग ले रहे हैं।
बस्तर की नई पहचान की ओर कदम
सड़क, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और लघु वनोपज के प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात सरकार की ओर से कही गई है।
तिरंगा यात्रा के जरिए बस्तर के लोगों के बीच शांति, एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
नारायणपुर से उठी तिरंगे की यह लहर अब दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के रास्ते कर्रेगुट्टा तक पहुंचेगी।
बस्तर की धरती पर अब बंदूकों की नहीं, तिरंगे की पहचान मजबूत करने का संदेश दिया जा रहा है।
