रायपुर, 28 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और जनजातीय पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए राज्य में एक विशेष शोध परियोजना की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य कर रहा है।
‘एथ्नोबॉटनी ऑफ छत्तीसगढ़’ परियोजना की शुरुआत
‘एथ्नोबॉटनी ऑफ छत्तीसगढ़‘ नामक इस शोध परियोजना का उद्देश्य राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय और जनजातीय समुदायों द्वारा औषधीय एवं उपयोगी पौधों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करना है। इसके साथ ही इस ज्ञान का वैज्ञानिक अध्ययन कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

बस्तर संभाग से शुरू हुआ शोध कार्य
परियोजना के पहले चरण की शुरुआत बस्तर संभाग से की गई है। इसके तहत विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम ने बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव और कांकेर जिलों का दौरा कर स्थानीय समुदायों के बीच अध्ययन किया।
शोध दल में टी.डी.यू. बेंगलुरु के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. के. रवि कुमार, प्रोफेसर डॉ. अब्दुल करीम तथा जनजातीय औषधि विशेषज्ञ डॉ. देवयानी शर्मा शामिल हैं।
वैद्यों और ग्रामीणों से जुटाई पारंपरिक जानकारी
वैज्ञानिकों ने बीजापुर जिले के भोपालपटनम, उसूर, भैरमगढ़ और बीजापुर क्षेत्र सहित कई गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान पारंपरिक वैद्यों और ग्रामीणों से औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों और उनके पारंपरिक उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र की गईं।
विशेषज्ञों ने जंगलों का दौरा कर स्थानीय वैद्यों की मदद से विभिन्न औषधीय पौधों की पहचान भी की, ताकि पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक रूप से सत्यापन किया जा सके।
संस्कृति और आजीविका से जुड़ी वनस्पतियों का अध्ययन
यह शोध केवल औषधीय पौधों तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक स्थानीय समुदायों के दैनिक जीवन, सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और आजीविका में पेड़-पौधों की भूमिका का भी अध्ययन कर रहे हैं।
इसके माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि वनस्पतियां जनजातीय समाज की अर्थव्यवस्था, जीवनशैली और पारंपरिक संस्कृति का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पूरे प्रदेश में होगा विस्तार
शोध परियोजना के पहले चरण में बस्तर संभाग से महत्वपूर्ण जानकारियां और प्रारंभिक आंकड़े एकत्र किए गए हैं। आगामी चरणों में इस अध्ययन का विस्तार राज्य के अन्य संभागों में भी किया जाएगा, ताकि पूरे छत्तीसगढ़ की जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक ज्ञान का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जा सके।
संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
वन विभाग के अनुसार यह परियोजना राज्य की जैव विविधता, जनजातीय ज्ञान और औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक आधार मिलेगा, जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
