छत्तीसगढ़ |संगीता सिंह चौहान
छत्तीसगढ़ में सरकारी शराब दुकानों की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भानुप्रतापपुर में पुलिस की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में खाली शराब बोतलें, ढक्कन, स्टीकर और होलोग्राम बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
इस मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि रायपुर के लालपुर शराब दुकान से जुड़े मामले में भी होलोग्राम और मिलावटी शराब का मामला सामने आया था।
अब सवाल यह है कि क्या लालपुर और भानुप्रतापपुर में बरामद होलोग्राम एक ही सप्लाई चैन से जुड़े हैं?
अगर जांच में दोनों जगह के होलोग्राम के सीरियल नंबर, बैच और सुरक्षा चिन्ह समान या एक ही स्रोत से जुड़े पाए जाते हैं, तो मामला केवल शराब दुकान के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा।
BIS कंपनी की भूमिका भी जांच के घेरे में क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल होलोग्राम की सप्लाई को लेकर है।
ये होलोग्राम किस कंपनी ने बनाए?
किसके आदेश पर जारी किए गए?
किस सरकारी शराब दुकान के लिए कितनी संख्या में भेजे गए?
उनका इस्तेमाल कहां-कहां हुआ?
और लालपुर तथा भानुप्रतापपुर में मिले होलोग्राम का रिकॉर्ड क्या कहता है?
आम आदमी पार्टी के नेता नरेंद्र नाग ने आरोप लगाया है कि सरकारी शराब व्यवस्था में मिलावट का बड़ा खेल चल रहा है। उन्होंने सरकार और आबकारी विभाग पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
AAP का आरोप है कि अगर अलग-अलग स्थानों से एक जैसे होलोग्राम बरामद हो रहे हैं, तो होलोग्राम सप्लाई करने वाली कंपनी/एजेंसी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
प्राप्त जानकारी अनुसार BIS कंपनी पे लालपुर, रायपुर मिलावटी शराब मामले मे कार्यवाई के तहत लगभग 3करोड़ की पेनालिटी लग चुकी है
हालांकि, BIS कंपनी की मिलीभगत का आरोप अभी जांच के दायरे मे है, इसलिए जांच एजेंसियों को होलोग्राम के सीरियल नंबर, बैच रिकॉर्ड, सप्लाई रजिस्टर और संबंधित कंपनियों के दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।
सीधे सवाल
क्या लालपुर और भानुप्रतापपुर के होलोग्राम का मिलान कराया गया है?
अगर हां, तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
अगर नहीं, तो अब तक जांच क्यों नहीं हुई?
होलोग्राम की पूरी सप्लाई चेन का ऑडिट कब होगा?
और अगर किसी अधिकारी, कर्मचारी या कंपनी की भूमिका सामने आती है, तो क्या सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या जिम्मेदार सभी लोगों पर FIR होगी?
भानुप्रतापपुर मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी शराब दुकानों में बोतल से लेकर होलोग्राम तक की निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है।
अब जरूरत है ऐसी जांच की, जिसमें सिर्फ शराब दुकान के कर्मचारी नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन, आबकारी अधिकारियों और होलोग्राम जारी करने वाली एजेंसी/कंपनी की भूमिका भी सामने लाई जाए। फिलहाल विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे बैठे है कब कहाँ कैसे और किसकी किसकी है मिली भगत बहुत जल्द आपके पास पढ़ें हमारी अगले कड़ी मे. …..
