सारंगढ़-बिलाईगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड के ग्राम कंचनपुर की रहने वाली प्रेम कुमारी सारथी ने आधुनिक तकनीक और पशुपालन विभाग के सहयोग से अपनी जिंदगी बदल दी है। कृत्रिम गर्भाधान तकनीक अपनाकर उन्होंने पारंपरिक पशुपालन को सफल डेयरी व्यवसाय में बदल दिया और आज वे हर महीने करीब ₹25 हजार की नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
प्रेम कुमारी की सफलता की शुरुआत पशुपालन विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से हुई। विभागीय पशु चिकित्सकों के मार्गदर्शन में किए गए कृत्रिम गर्भाधान से जन्मी बछियाएं आज उच्च उत्पादक दुधारू गाय बन चुकी हैं। वर्तमान में उनके पास एचएफ (होल्सटीन फ्रिजियन) और जर्सी नस्ल की कुल पांच दुधारू गायें हैं, जो उनके डेयरी व्यवसाय का मुख्य आधार हैं।
इन गायों से प्रतिदिन लगभग 25 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। प्रेम कुमारी इस दूध को बरमकेला स्थित अमृत डेयरी में ₹40 प्रति लीटर की दर से बेचती हैं। इससे उन्हें हर महीने लगभग ₹25 हजार की नियमित आमदनी हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे आत्मनिर्भर बनी हैं।
प्रेम कुमारी अपनी सफलता का श्रेय पशुधन विकास विभाग और पशु चिकित्सालय बरमकेला की टीम को देती हैं। उनका कहना है कि विभाग की ओर से समय-समय पर कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, कृमिनाशन, पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उनके पशु स्वस्थ और अधिक उत्पादक बने।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने और विभाग के लगातार सहयोग से उनका डेयरी व्यवसाय नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है। इससे न केवल परिवार की आय बढ़ी है, बल्कि भविष्य के प्रति उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।
आज प्रेम कुमारी सारथी अपने क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी उन्नत नस्ल सुधार, वैज्ञानिक पशुपालन और डेयरी व्यवसाय की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि ग्रामीण पशुपालकों को सही तकनीकी मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ और आधुनिक पशुपालन की जानकारी मिले, तो डेयरी व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है।
