रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के 7.14 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 162.32 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) राशि के वितरण की शुरुआत की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार तेन्दूपत्ता संग्राहकों, वनवासियों और आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य में तेन्दूपत्ता संग्रहण दर 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है, जिससे संग्राहक परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
621 समितियों के 7.14 लाख संग्राहकों को मिलेगा बोनस
वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर 3 जुलाई को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रोत्साहन पारिश्रमिक वितरण का शुभारंभ किया।
इसके तहत—
- 621 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों से जुड़े 7,14,446 संग्राहकों को लाभ मिलेगा।
- कुल 162.32 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा रही है।
- राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजी जा रही है।
- भुगतान की प्रक्रिया तेजी से जारी है और जल्द पूरी कर ली जाएगी।
11.15 लाख संग्राहकों को पहले ही मिल चुके हैं 734.25 करोड़ रुपये
वन मंत्री ने बताया कि संग्रहण सत्र 2026 में भी सरकार ने समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है।
इसके तहत—
- लगभग 11.15 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को लाभ मिला।
- 734.25 करोड़ रुपये की संग्रहण पारिश्रमिक राशि सीधे बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर की जा चुकी है।
- इससे लाखों वनवासी और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।
5,500 रुपये प्रति मानक बोरा मिलने से बढ़ी संग्राहकों की आय
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार ने तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी है।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय से—
- संग्राहक परिवारों की आय में वृद्धि हुई है।
- ग्रामीण और वनवासी परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक संबल मिला है।
- जंगलों पर निर्भर परिवारों की आजीविका और मजबूत हुई है।
पारदर्शी और तकनीक आधारित भुगतान व्यवस्था पर जोर
वन मंत्री ने कहा कि तेन्दूपत्ता प्रदेश के लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इसलिए राज्य सरकार संग्रहण से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बना रही है।
उन्होंने कहा कि इससे संग्राहकों को भुगतान में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचेगी।
वनवासियों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार—
- तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर पारिश्रमिक उपलब्ध करा रही है।
- वनवासियों की आय बढ़ाने के लिए नई पहल कर रही है।
- वन आधारित आजीविका को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
- आदिवासी और वनवासी परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
