रायपुर, 01 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के निर्देशन में संयुक्त कार्रवाई करते हुए वन विभाग की टीम ने दो बाघों की खाल के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई कांकेर जिले के पश्चिम भानुप्रतापपुर स्थित बांदे परिक्षेत्र में छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। वन विभाग ने आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र के दो आरोपी गिरफ्तार
वन विभाग के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के निवासी ब्येश्वर और बाबूराव के रूप में हुई है।

दोनों आरोपी मोटरसाइकिल से अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव बाघ की दो खालों की अवैध तस्करी कर रहे थे। संयुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
संयुक्त अभियान में कई एजेंसियां रहीं शामिल
इस कार्रवाई को कई एजेंसियों के संयुक्त अभियान के तहत अंजाम दिया गया।
अभियान में शामिल प्रमुख एजेंसियां—
- Wildlife Crime Control Bureau (उत्तरी एवं मध्य क्षेत्र)
- राज्य उड़नदस्ता दल (छत्तीसगढ़ वन विभाग)
- एंटी पोचिंग यूनिट (यूएसटीआर)
- स्थानीय वन अमला
सभी एजेंसियों के समन्वित प्रयास से यह कार्रवाई सफल रही।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई जारी है। विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही इस गिरोह के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वन्यजीव तस्करी पर सरकार की सख्ती
राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को लेकर लगातार सख्त कदम उठा रही है। वन विभाग विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर नियमित निगरानी और संयुक्त अभियान चला रहा है, ताकि वन्यजीवों की अवैध तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
बाघ जैसे संरक्षित वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
न्यायालय ने भेजा न्यायिक हिरासत में
गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
वन विभाग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की कार्रवाई जारी है।
