रायपुर | 27 जून 2026
रायगढ़ जिले के सकरबोगा पंचायत अंतर्गत ग्राम साल्हेओना के प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ ने खेती में नवाचार अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने आज उन्हें हर साल 2 से 2.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आय दिलानी शुरू कर दी है। दो एकड़ में फैली उनकी अनानास की खेती अब क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
शौक से शुरू हुई खेती बनी सफल व्यवसाय
अरुण कुमार सॉ पहले धान सहित पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। कई वर्ष पहले उन्होंने घरेलू उपयोग के लिए खेत की मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए थे। पौधों की अच्छी बढ़वार और बेहतर गुणवत्ता के फल मिलने के बाद उन्होंने इसे बड़े स्तर पर अपनाने का फैसला किया।
पौधों से निकलने वाले प्ररोह (सकर) को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला शुरू हुआ। कृषि विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन मिलने के बाद उनका यह छोटा प्रयोग धीरे-धीरे दो एकड़ के अनानास बगीचे में बदल गया। वर्तमान में उनके खेत में आम और अमरूद के पेड़ों के बीच कतारबद्ध अनानास की खेती बहुफसली कृषि का सफल उदाहरण बन चुकी है।
कम लागत में बेहतर मुनाफा
अनानास की खेती की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम उत्पादन लागत है। इस फसल में खाद, कीटनाशक और सिंचाई की अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है, जिससे खेती का खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में अनानास की लगातार मांग बनी रहने से किसानों को अच्छा लाभ मिलता है।
अरुण सॉ के खेत में तैयार होने वाले प्रत्येक अनानास की गुणवत्ता के अनुसार 40 से 80 रुपये तक कीमत मिलती है, जिससे उन्हें नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
प्ररोहों की बिक्री से भी हो रही कमाई
फलों की बिक्री के अलावा अनानास के पौधों से निकलने वाले प्ररोह (रोपण सामग्री) भी उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गए हैं। अन्य किसान इन प्ररोहों को खरीदकर अपने खेतों में अनानास की खेती शुरू कर रहे हैं। इससे क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों के प्रति किसानों का रुझान भी बढ़ रहा है।
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कृषि विविधीकरण का बने उदाहरण
अरुण कुमार सॉ की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान अब पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को भी अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
किसानों को दिया सफलता का संदेश
अरुण कुमार सॉ का कहना है कि खेती में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही फसल का चयन, नई तकनीक का उपयोग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह अपनाने से मिलती है। उनका मानना है कि यदि किसान स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें, तो सीमित जमीन और संसाधनों में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है।
