रायपुर | 27 जून 2026
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम बिलासपुर की रहने वाली राजकुमारी साहू ने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर अपनी जिंदगी की तस्वीर बदल दी है। कभी परिवार का पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर रहीं राजकुमारी आज छत्तीसगढ़ शासन की ‘बिहान’ (राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना के माध्यम से सफल उद्यमी बन चुकी हैं। आज वे न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
आर्थिक तंगी ने किया था पलायन के लिए मजबूर
राजकुमारी साहू का शुरुआती जीवन आर्थिक अभावों में बीता। परिवार के पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था, जिसके कारण उन्हें बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में अपने परिवार के साथ दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन करना पड़ा। कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए उनके मन में हमेशा अपने गांव लौटकर सम्मानजनक जीवन जीने का सपना था।
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‘बिहान’ योजना ने बदली जिंदगी की दिशा
गांव लौटने के बाद राजकुमारी साहू को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने महिलाओं को संगठित कर ‘जय मां संतोषी महिला स्व-सहायता समूह’ का गठन किया। शुरुआत में 10 महिलाओं ने प्रति माह 100 रुपये की बचत के साथ समूह की नींव रखी। धीरे-धीरे यह समूह आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ता गया।
पलायन के दौरान सीखा हुनर बना रोजगार का आधार
दूसरे राज्यों में मजदूरी के दौरान राजकुमारी ने आइसक्रीम और कुल्फी बनाने की प्रक्रिया सीखी थी। गांव लौटने के बाद उन्होंने इसी अनुभव को व्यवसाय में बदलने का फैसला किया। ‘बिहान’ योजना के तहत समूह को 1.50 लाख रुपये का बैंक ऋण और 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि (CIF) उपलब्ध कराई गई।
इस आर्थिक सहायता से उन्होंने मटका कुल्फी, विभिन्न प्रकार की आइसक्रीम और बादाम शेक जैसे उत्पाद तैयार करना शुरू किया। बेहतर गुणवत्ता और स्वाद के कारण उनके उत्पादों की मांग बिलाईगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ने लगी।
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तीन लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय
राजकुमारी साहू का यह छोटा-सा उद्यम आज एक सफल व्यवसाय का रूप ले चुका है। वर्तमान में उनका समूह और उनका व्यवसाय मिलकर 3 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय अर्जित कर रहा है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली राजकुमारी आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
अन्य महिलाओं को भी बना रहीं आत्मनिर्भर
राजकुमारी साहू अब केवल एक सफल उद्यमी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन चुकी हैं। वे अपने समूह की अन्य महिलाओं को व्यवसाय से जुड़ी जानकारी और प्रशिक्षण देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी महिला अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकती है।
महिला सशक्तिकरण की बनी मिसाल
राजकुमारी साहू की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर ग्रामीण महिलाएं भी रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। उनकी यह यात्रा छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है।
