बलरामपुर।
बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कोठली गांव में सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव की एक पंचायत ने गड्ढे में भैंस की मौत के बाद दो परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके खिलाफ “हुक्का-पानी बंद” करने का फरमान सुनाया गया है, जिससे उन्हें मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
मामले में स्थानीय पुलिस से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार अब न्याय की मांग लेकर बलरामपुर एसपी कार्यालय पहुंचे हैं।
“हुक्का-पानी बंद”, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का आरोप
जानकारी के अनुसार, शंकरगढ़ विकासखंड के कोठली गांव में एक भैंस की गड्ढे में गिरकर मौत हो गई थी। इसके बाद गांव में आयोजित पंचायत में कथित तौर पर दो परिवारों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया गया।

पीड़ितों का आरोप है कि पंचायत के फैसले के बाद गांव में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है और गांव के लोगों को उनसे संपर्क नहीं रखने के लिए कहा गया है।पीड़ित परिवारों का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार के कारण उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है। परिवार के सदस्यों को गांव में अपमान और उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत के फैसले के बाद उन्हें मानसिक दबाव के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। परिवारों का कहना है कि इस स्थिति के कारण उनका सामाजिक जीवन लगभग ठप हो गया है।

पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत शंकरगढ़ थाने में की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई नहीं होने से निराश होकर वे बलरामपुर एसपी कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सामाजिक बहिष्कार कराने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
मामले को लेकर सर्व यादव समाज के पदाधिकारी भी पीड़ित परिवारों के समर्थन में सामने आए हैं। ब्लॉक अध्यक्ष के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना कानून और मानवाधिकारों की भावना के खिलाफ है।मामला अब जिला प्रशासन और पुलिस के संज्ञान में पहुंच चुका है। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
