कवर्धा । जिला अस्पताल कवर्धा ने नवजात शिशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए मानवता, समर्पण और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में मात्र 870 ग्राम वजन के अति समयपूर्व (एक्सट्रीम प्रीटर्म) जन्मे नवजात शिशु का सफल उपचार कर उसे पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में घर भेजा गया। जन्म के समय शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और उसके जीवित रहने की संभावना बेहद कम थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की अथक मेहनत ने इस नन्ही जान को नया जीवन दे दिया।
लगभग एक माह तक चले गहन उपचार, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ निगरानी के बाद नवजात का वजन 870 ग्राम से बढ़कर 1600 ग्राम हो गया। सभी चिकित्सकीय परीक्षणों में स्वस्थ पाए जाने के बाद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर परिजनों को सौंप दिया गया।
जन्म के तुरंत बाद एसएनसीयू में शुरू हुआ जीवन बचाने का संघर्ष
अत्यंत कम वजन और समयपूर्व जन्म लेने के कारण नवजात को जन्म के तुरंत बाद जिला अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती किया गया। यहां शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शलिल मिश्रा के मार्गदर्शन में डॉ. त्रिभुवन जायसवाल सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने चौबीसों घंटे उसकी लगातार निगरानी की।
उपचार के दौरान नवजात को श्वसन सहायता (रेस्पिरेटरी सपोर्ट), शरीर का तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था, संक्रमण से सुरक्षा, संतुलित पोषण और नवजात गहन चिकित्सा की सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रत्येक चरण में उसकी स्थिति पर विशेषज्ञ टीम की सतत निगरानी बनी रही।
एक महीने की अथक मेहनत से 870 ग्राम से बढ़कर हुआ 1600 ग्राम वजन
करीब एक महीने तक चले निरंतर उपचार और समर्पित देखभाल के सकारात्मक परिणाम सामने आए। धीरे-धीरे नवजात के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा और उसका वजन 870 ग्राम से बढ़कर 1600 ग्राम तक पहुंच गया।
चिकित्सकों ने बताया कि सभी आवश्यक चिकित्सकीय जांचों में शिशु की स्थिति पूरी तरह स्थिर पाई गई, जिसके बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी देकर परिवार को सौंप दिया गया। यह सफलता जिला अस्पताल की नवजात चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता का प्रमाण मानी जा रही है।
अत्यंत कम वजन वाले नवजात का उपचार होता है बेहद चुनौतीपूर्ण
डॉ. त्रिभुवन जायसवाल ने बताया कि अत्यंत कम वजन और समयपूर्व जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं का उपचार चिकित्सा विज्ञान की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है। ऐसे मामलों में प्रत्येक क्षण बेहद महत्वपूर्ण होता है और छोटी सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम दे सकती है।
उन्होंने कहा कि समय पर उपचार, संक्रमण से प्रभावी सुरक्षा, संतुलित पोषण, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, निरंतर मॉनिटरिंग और पूरी एसएनसीयू टीम के सामूहिक प्रयासों से ही ऐसे नवजातों को सुरक्षित जीवन प्रदान किया जा सकता है।
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का परिणाम है यह सफलता
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. केशव धुव्र ने इस उपलब्धि पर पूरी एसएनसीयू टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता अस्पताल में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकों की विशेषज्ञता, आधुनिक नवजात चिकित्सा सुविधाओं और नर्सिंग स्टाफ की प्रतिबद्धता का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल का उद्देश्य प्रत्येक मरीज, विशेषकर नवजात शिशुओं और गंभीर रोगियों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है। भविष्य में भी अस्पताल इसी समर्पण और गुणवत्ता के साथ उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता रहेगा।
माता-पिता ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का जताया आभार
अपने बच्चे को स्वस्थ देखकर नवजात के माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने जिला अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और पूरी एसएनसीयू टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉक्टरों की विशेषज्ञता, संवेदनशील देखभाल और पूरी टीम की अथक मेहनत के कारण उनके बच्चे को नया जीवन मिल सका।
उन्होंने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि यह सुविधा जिले के लोगों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है, जहां गंभीर स्थिति में भी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिला अस्पताल कवर्धा बना नवजात चिकित्सा का भरोसेमंद केंद्र
870 ग्राम वजन के अति समयपूर्व जन्मे नवजात का सफल उपचार जिला अस्पताल कवर्धा की चिकित्सा क्षमता, आधुनिक सुविधाओं और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह उपलब्धि न केवल अस्पताल की एसएनसीयू टीम के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं और आधुनिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से गंभीर से गंभीर नवजातों को भी नया जीवन दिया जा सकता है।
इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि समर्पित चिकित्सकीय प्रयास, आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता मिलकर असंभव दिखने वाली परिस्थितियों को भी सफलता में बदल सकते हैं।
