धमतरी, 29 अक्टूबर 2026
ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्रामीण परिवारों की आजीविका, आर्थिक गतिविधियों और पारिवारिक उपभोग व्यय की वास्तविक स्थिति को समझने के उद्देश्य से भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के पूर्व सचिव श्री अमरजीत सिन्हा ने धमतरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मगरलोड एवं कुरुद विकासखंड के ग्राम केकराखोली और ग्राम पंचायत चर्रा में पहुंचकर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, पंचायत राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों और किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) के सदस्यों से सीधा संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों से उनकी आजीविका, आय के स्रोत, कृषि आधारित गतिविधियों और परिवारों के खर्च से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जयंत नाहटा ने पूर्व सचिव श्री सिन्हा को जिले में ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके प्रभावों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, कृषि एवं ग्रामीण आजीविका के संवर्धन तथा किसान उत्पादक कंपनियों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने ग्रामीण परिवारों की आय के प्रमुख स्रोतों, उपलब्ध आजीविका के अवसरों और शासन की योजनाओं से मिल रहे लाभों की जानकारी भी साझा की।
यह क्षेत्रीय भ्रमण भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा संचालित पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) के अंतर्गत तकनीकी विशेषज्ञ समूह के दौरे का हिस्सा था। इस सर्वेक्षण के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी परिवारों द्वारा खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं और विभिन्न सेवाओं पर किए जाने वाले खर्च से संबंधित विश्वसनीय आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर देश में उपभोग के स्वरूप, परिवारों के जीवन-स्तर और आर्थिक परिस्थितियों का आकलन किया जाता है। साथ ही, ये आंकड़े विकास योजनाओं के निर्माण और नीतिगत निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मगरलोड विकासखंड के ग्राम केकराखोली में श्री अमरजीत सिन्हा ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, प्रगतिशील कृषकों और एफपीसी सदस्यों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने ग्रामीण आजीविका के साधनों, कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों, महिला समूहों की भूमिका और किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से किसानों को मिल रहे अवसरों के बारे में जानकारी ली। संवाद के दौरान ग्रामीण परिवारों की आय के प्रमुख स्रोतों, कृषि एवं अन्य गतिविधियों से होने वाली आमदनी और दैनिक जरूरतों पर होने वाले खर्च की स्थिति को समझने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही यह जानने का प्रयास किया गया कि ग्रामीण परिवारों की उपभोग संबंधी प्राथमिकताओं में समय के साथ किस प्रकार बदलाव आ रहे हैं।
इसके बाद कुरुद विकासखंड के ग्राम पंचायत चर्रा में भी उन्होंने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और आर्थिक गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कृषि एवं गैर-कृषि आधारित आजीविका के अवसरों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका को समझा। ग्रामीणों के साथ प्रत्यक्ष बातचीत के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों, परिवारों की आर्थिक स्थिति और उनकी वास्तविक जरूरतों का आकलन किया गया।
पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़े परिवारों के खर्च के स्वरूप, उपभोग के रुझानों और जीवन-स्तर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराते हैं। इनका उपयोग आर्थिक एवं सांख्यिकीय विश्लेषण, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से संबंधित आकलन तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्माण और मूल्यांकन में किया जाता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों का प्रत्यक्ष भ्रमण और स्थानीय लोगों से संवाद सर्वेक्षण के आंकड़ों को जमीनी परिस्थितियों के संदर्भ में समझने में मददगार साबित होता है। धमतरी जिले के केकराखोली और चर्रा में हुए इस संवाद के माध्यम से ग्रामीण आजीविका, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और परिवारों के उपभोग व्यय से जुड़े विभिन्न पहलुओं को करीब से समझने का अवसर मिला।
