जल प्रभार से लेकर रखरखाव तक पंचायतों की जिम्मेदारी, पानी की बर्बादी पर जुर्माना और लगातार तीन माह शुल्क नहीं देने पर कनेक्शन काटने का प्रस्ताव
रायपुर, 18 सितम्बर 2026
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन और नल-जल योजनाओं से तैयार पेयजल परिसंपत्तियों के बेहतर संचालन और लंबे समय तक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई नियमावली तैयार करने पर मंथन शुरू हो गया है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन, संधारण, प्रबंधन और नियंत्रण की प्रस्तावित व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रस्तावित नियमों के तहत ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में निर्मित और हस्तांतरित ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन, रखरखाव, विस्तार और नियंत्रण की जिम्मेदारी दी जाएगी। पंचायतें जलापूर्ति की समय-सारणी तय करने के साथ जल प्रभार की वसूली भी करेंगी। नियमों का उल्लंघन होने पर जुर्माना लगाने और जरूरत पड़ने पर सेवा निलंबित करने जैसी कार्रवाई का अधिकार भी पंचायतों को दिए जाने पर विचार किया गया।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के परामर्श से छत्तीसगढ़ पंचायत (ग्रामीण नलजल संचालन, संधारण एवं प्रबंधन) नियम के तहत प्रस्तावित प्रावधानों पर चर्चा की। अधिकारियों को इन नियमों पर संबंधित पक्षों और प्रभावित व्यक्तियों से निर्धारित समय-सीमा में आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
योजनाओं के दैनिक संचालन के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम जल एवं स्वच्छता सहायक की नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की जाएगी। ये सहायक पंप और वॉल्व संचालन के साथ आवश्यक मरम्मत कार्यों में भी सहयोग करेंगे। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार इसके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास रखी जाएगी, जबकि आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।
ग्राम जल एवं स्वच्छता सहायकों को अधिकतम 5,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने तथा एकत्रित मासिक जल प्रभार की राशि का 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के रूप में देने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित नियमों में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए न्यूनतम मासिक जल प्रभार की दरें भी तय की गई हैं। जनजातीय विकासखंडों में न्यूनतम 60 रुपये प्रति परिवार प्रतिमाह, सामान्य गैर-जनजातीय विकासखंडों में न्यूनतम 100 रुपये प्रति परिवार प्रतिमाह और मास्टर प्लान अधिसूचित क्षेत्रों में न्यूनतम 120 रुपये प्रति परिवार प्रतिमाह जल प्रभार प्रस्तावित है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए न्यूनतम 500 रुपये प्रतिमाह या मीटर आधारित शुल्क का प्रावधान रखा गया है।
जल प्रभार से जुड़ी व्यवस्था को ऑनलाइन रखने के लिए बिल समर्थ पंचायत पोर्टल के माध्यम से जारी और संग्रहित किए जाएंगे। लगातार तीन महीने तक जल प्रभार जमा नहीं करने पर नल कनेक्शन काटने की कार्रवाई का प्रावधान भी प्रस्तावित नियमों में शामिल है।
पेयजल की बर्बादी रोकने के लिए भी सख्त प्रावधानों पर चर्चा हुई। वाहन धोने, मवेशियों को नहलाने, टुल्लू या विद्युत पंप लगाकर पानी खींचने अथवा कृषि कार्य में पेयजल का इस्तेमाल करने जैसे मामलों में पहली बार न्यूनतम 100 रुपये तथा बार-बार पानी की बर्बादी करने पर न्यूनतम 500 रुपये जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। बार-बार उल्लंघन की स्थिति में कनेक्शन विच्छेद करने की कार्रवाई भी की जा सकेगी।
यदि किसी तृतीय पक्ष या निर्मा
