रायपुर, 09 सितंबर 2026
अंबिकापुर के बोरीपारा, शिकारी रोड की रहने वाली विमला यादव के लिए हर महीने बैंक खाते में आने वाली 1,000 रुपये की राशि अब घरेलू जरूरतों को संभालने का महत्वपूर्ण जरिया बन गई है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली इस सहायता का इस्तेमाल वे बच्चों की पढ़ाई, घर के राशन और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए करती हैं। इसके साथ ही विमला ने किराना दुकान शुरू कर परिवार की आमदनी में भी अपना योगदान बढ़ाया है।
विमला बताती हैं कि बच्चों की स्कूल और कोचिंग फीस जमा करनी हो या घर का राशन खरीदना हो, महतारी वंदन की राशि जरूरत के समय उनके काम आती है। परिवार में किसी के स्वास्थ्य से जुड़ा खर्च सामने आने पर भी वे इसी राशि का उपयोग करती हैं। उनके मुताबिक, नियमित रूप से मिलने वाली रकम ने छोटे-छोटे खर्चों के लिए आर्थिक सहारा दिया है।
पहले अपनी छोटी जरूरतों के लिए भी विमला को पति से पैसे मांगने पड़ते थे। कई बार पैसे की कमी के कारण जरूरी खर्च टालने की स्थिति भी बनती थी। अब उनके अपने बैंक खाते में नियमित राशि आने से उन्हें खर्चों को लेकर अधिक स्वतंत्रता मिली है। वे अपनी प्राथमिकता के हिसाब से तय कर पा रही हैं कि सहायता राशि का इस्तेमाल कहां करना है।
विमला ने केवल योजना से मिलने वाली सहायता तक खुद को सीमित नहीं रखा। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए उन्होंने छोटी किराना दुकान शुरू की और अब उसका संचालन स्वयं कर रही हैं। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ दुकान चलाकर वे परिवार की आय बढ़ाने में भी भागीदारी निभा रही हैं।
किराना दुकान उनके लिए आय का अतिरिक्त जरिया बनने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक कदम है। नियमित आर्थिक सहायता और अपने व्यवसाय के जरिए विमला अब घर की छोटी-बड़ी जरूरतों में पहले से ज्यादा योगदान दे पा रही हैं।
महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल उपलब्ध कराने के साथ उनके परिवार से जुड़े जरूरी खर्चों में मदद देना है। विमला की कहानी में इस सहायता का इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा, राशन और स्वास्थ्य जरूरतों के साथ आर्थिक आत्मविश्वास बढ़ाने के रूप में सामने आता है।
विमला यादव ने योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। उनका कहना है कि हर महीने मिलने वाली राशि जरूरत के समय सहारा देती है और अपने खर्चों को लेकर खुद निर्णय लेने का भरोसा भी बढ़ाती है। किराना दुकान के साथ अब वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में पहले से अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
क्रमांक-7799/सुनील त्रिपाठी/अजीत
