रायपुर | 12 अगस्त 2026
आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों को धान खरीदी और कृषि संबंधी सेवाएं बिना किसी परेशानी के मिलें, इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ यानी मार्कफेड ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
मार्कफेड में प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में धान खरीदी, खाद वितरण, वित्तीय प्रबंधन और अधोसंरचना विकास समेत कई महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई।
पुराने धान के उठाव और निराकरण पर फोकस
बैठक में खरीफ वर्ष 2025-26 में उपार्जित धान के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की गई।
इस दौरान—
- मिलर्स द्वारा धान उठाव
- FCI और नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा
- कस्टम मिलिंग
- परिवहन व्यवस्था
- समितियों में बचे धान की स्थिति
- भंडारण क्षमता का उपयोग
जैसे मुद्दों पर अधिकारियों से जानकारी ली गई।
अधिकारियों को धान का समयबद्ध निराकरण और उपलब्ध भंडारण क्षमता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
नई धान खरीदी के लिए खरीदी केंद्र होंगे तैयार
खरीफ सीजन 2026-27 को लेकर उपार्जन केंद्रों की तैयारियों पर भी विशेष जोर दिया गया।
धान खरीदी शुरू होने से पहले केंद्रों पर बारदाना, जरूरी उपकरण और मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा किसानों को खरीदी के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए—
किसान पंजीयन, CCTV कैमरे, इंटरनेट और बिजली व्यवस्था को भी समय पर पूरा करने को कहा गया।
यूरिया-DAP की उपलब्धता पर भी नजर
बैठक में खाद वितरण व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा हुई।
यूरिया, DAP और NPK समेत अन्य उर्वरकों की उपलब्धता, समितिवार वितरण, स्टॉक सत्यापन और परिवहन व्यवस्था की जानकारी ली गई।
आगामी खरीफ सीजन की मांग को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों को खाद के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
वित्तीय व्यवस्था की भी हुई समीक्षा
लेखा शाखा की समीक्षा के दौरान मार्कफेड की वित्तीय स्थिति पर भी चर्चा हुई।
इसमें आय-व्यय, लंबित देयकों की वसूली, भुगतान, ऑडिट आपत्तियों का निराकरण, बैंक मिलान और लंबित अग्रिम राशि के समायोजन की प्रगति देखी गई।
साथ ही समितियों से जुड़े लंबित मामलों और शिकायतों के निराकरण की स्थिति भी जांची गई।
लंबित मामलों पर तय होगी जिम्मेदारी
प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी ने सभी शाखा और कक्ष प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए।
व्यवसायिक गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग करने और अगली समीक्षा बैठक में अपडेटेड प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
