रायपुर। नारायणपुर जिले में आयुष विभाग की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी हैं। यूनानी और आयुर्वेदिक औषधियों के साथ पंचकर्म और शिरोधारा जैसी पारंपरिक उपचार पद्धतियों के समन्वित उपयोग से कई मरीजों को राहत मिली है। आयुष विभाग का दावा है कि लंबे समय से दर्द और शारीरिक समस्याओं से परेशान मरीज अब सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
घुटना प्रत्यारोपण की सलाह के बाद बिना सर्जरी मिली राहत
नारायणपुर निवासी 45 वर्षीय इश्वरी यादव लंबे समय से दोनों घुटनों के असहनीय दर्द, सूजन और चलने-फिरने में कठिनाई से परेशान थीं। चिकित्सकों ने उन्हें घुटना प्रत्यारोपण (नी-रिप्लेसमेंट) की सलाह दी थी।
आयुष विभाग में यूनानी और आयुर्वेदिक औषधियों के साथ नियमित शिरोधारा चिकित्सा शुरू की गई। उपचार के बाद धीरे-धीरे दर्द और सूजन में सुधार हुआ और बिना सर्जरी के वे स्वस्थ हो गईं। वर्तमान में वे सामान्य जीवन जीने के साथ अपना होटल भी संचालित कर रही हैं।
मधुमेह से जुड़ी समस्याओं में भी मिला लाभ
55 वर्षीय प्रमोद पांडेय मधुमेह के कारण अत्यधिक कमजोरी, नसों में झुनझुनी, पैरों के भारीपन और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति ऐसी हो गई थी कि वे 100 मीटर तक पैदल नहीं चल पा रहे थे।
आयुष विभाग में यूनानी और आयुर्वेदिक दवाओं के साथ शिरोधारा थेरेपी के जरिए उनका उपचार किया गया। विभाग के अनुसार उपचार के बाद उनकी शारीरिक ऊर्जा बढ़ी, मानसिक तनाव कम हुआ और चलने-फिरने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आया।
पंचकर्म से प्रसव के बाद होने वाले दर्द से मिली राहत
35 वर्षीय अर्पना नाग गर्भावस्था के दौरान शुरू हुए दाहिने पैर के दर्द और झुनझुनी से प्रसव के बाद भी परेशान थीं। करीब सात से आठ महीने तक उन्हें चलने-फिरने और उठने-बैठने में दिक्कत होती रही।
आयुष केंद्र में यूनानी-आयुर्वेदिक उपचार के साथ पंचकर्म थेरेपी शुरू की गई। विभाग के मुताबिक एक सप्ताह के भीतर उन्हें 50 प्रतिशत से अधिक राहत मिली और दो महीने के उपचार के बाद वे पूरी तरह स्वस्थ हो गईं।
महिलाओं की जटिल स्वास्थ्य समस्याओं में भी मिला लाभ
50 वर्षीय कल्पना शर्मा पिछले एक वर्ष से मेनोरेजिया (अत्यधिक और अनियमित मासिक रक्तस्राव) की समस्या से पीड़ित थीं। लगातार रक्तस्राव, पेट दर्द और कमजोरी के कारण उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया था।
आयुष विभाग द्वारा यूनानी और आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार शुरू किए जाने के लगभग 10 दिनों के भीतर रक्तस्राव नियंत्रित हो गया और उन्हें दर्द व कमजोरी से भी राहत मिली।
‘समन्वित उपचार से मिल रहे सकारात्मक परिणाम’
आयुष विभाग का कहना है कि नारायणपुर में यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वित उपयोग से कई मरीजों को लाभ मिला है। विभाग के अनुसार सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन में पारंपरिक उपचार पद्धतियां अनेक रोगों के प्रबंधन में प्रभावी साबित हो रही हैं।
डॉ. साहू के मार्गदर्शन में संचालित यह पहल नारायणपुर में जनस्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।
