बलरामपुर। जिले के ग्राम पंचायत कोटसरी में गोचर भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से पशुओं के चरने और बांधने के लिए उपयोग में आने वाली सार्वजनिक गोचर भूमि का पट्टा दूसरे गांव के एक व्यक्ति के नाम कर दिया गया है। इस फैसले के विरोध में ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि किसी भी कीमत पर गोचर भूमि पर कब्जा नहीं होने दिया जाएगा।
गोचर भूमि को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि का उपयोग उनके पूर्वजों के समय से गांव के मवेशियों के चरने और बांधने के लिए किया जाता रहा है। उनका आरोप है कि अब इस जमीन का पट्टा दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम जारी कर दिया गया है, जिससे पूरे गांव में आक्रोश है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पट्टे की वैधानिक जांच कर उसे निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
‘किसी भी कीमत पर कब्जा नहीं होने देंगे’
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग की है और गांव के पशुपालकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि यदि इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई तो पूरे गांव के लोग इसका विरोध करेंगे।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति विरोध करने पर पहले से पट्टा होने का दावा करता है, जबकि गांव के लोगों का कहना है कि यह भूमि हमेशा से गोचर भूमि के रूप में उपयोग होती रही है।
प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा
मामले पर बलरामपुर एसडीएम अभिषेक गुप्ता ने कहा कि यदि किसी के द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है तो उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि यदि फर्जी पट्टे की शिकायत सही पाई जाती है तो उसकी भी जांच कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब यह देखना होगा कि जांच के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और गोचर भूमि को लेकर उठे विवाद का समाधान किस तरह होता है।
