कवर्धा। स्वच्छ भारत मिशन को जनआंदोलन बनाने की दिशा में कबीरधाम जिले के विकासखंड कवर्धा की ग्राम पंचायत धरमपुरा के 85 वर्षीय तिरिथ राम साहू मिसाल बनकर उभरे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे पूरे उत्साह और समर्पण के साथ गांव को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। पिछले छह महीनों से वे प्रतिदिन गांव की सफाई करने के साथ ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
घर-घर पहुंचकर दे रहे स्वच्छता का संदेश
तिरिथ राम साहू हर सुबह गांव की गलियों की सफाई, प्लास्टिक कचरे का संग्रहण और नालियों की सफाई में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही वे ग्रामीणों को खुले में कचरा नहीं फेंकने, गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने तथा प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं।
वे घर-घर जाकर लोगों को स्वच्छता का महत्व समझाते हैं। कचरा संग्रहण के दौरान स्वच्छाग्रही दीदियों के साथ ग्रामीणों को सहयोग के लिए प्रेरित करते हैं और एकत्रित प्लास्टिक कचरे को संग्रहण केंद्र तक पहुंचाने में भी सक्रिय योगदान देते हैं। स्वयं हमेशा कपड़े का थैला इस्तेमाल कर वे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश कर रहे हैं।
‘जनभागीदारी से ही सफल होगा स्वच्छता अभियान’
कलेक्टर गोपाल वर्मा ने तिरिथ राम साहू के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यही वास्तविक जनभागीदारी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान तभी सफल होगा, जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें सक्रिय भूमिका निभाएगा। तिरिथ राम साहू जैसे नागरिक पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि तिरिथ राम साहू ने साबित कर दिया है कि यदि सेवा का जज्बा हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। उनका समर्पण युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है और ऐसे नागरिक वास्तव में स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेसडर हैं।
गांव में 90 प्रतिशत तक घटा प्लास्टिक का उपयोग
जिला समन्वयक संजय सोनी ने बताया कि तिरिथ राम साहू के लगातार जागरूकता अभियान का सकारात्मक असर देखने को मिला है। उनके समझाने के तरीके से गांव में प्लास्टिक के उपयोग में लगभग 90 प्रतिशत तक कमी आई है। अब गांव में खुले में कचरा लगभग दिखाई नहीं देता और लोग पहले की तुलना में अधिक स्वच्छता के प्रति जागरूक हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि तिरिथ राम साहू प्रतिदिन उन्हें स्वच्छता के लिए प्रेरित करते हैं। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि अब बच्चे भी कचरा डस्टबिन में डालते हैं और पूरा गांव पहले की अपेक्षा अधिक साफ, सुंदर और स्वच्छ नजर आता है।
