बीजापुर, 3 जुलाई 2026। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत संचालित चिरायु दल दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगा रहा है। बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के ग्राम मीनागट्टा (पामेड़) निवासी 15 वर्षीय माड़कम हुंगा की कहानी इस योजना की सफलता का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है। जन्मजात गंभीर शारीरिक समस्या से जूझ रहे इस किशोर का निःशुल्क उपचार कर उसे नया जीवन और आत्मविश्वास प्रदान किया गया।
राज्य सरकार द्वारा संचालित इस पहल का उद्देश्य ऐसे बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के मार्ग में बाधा न बने।
जन्म से थी कटे होंठ और तालु की गंभीर समस्या
माड़कम हुंगा जन्म से ही कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस जन्मजात विकार के कारण उसे भोजन करने, स्पष्ट रूप से बोलने और सामान्य जीवन जीने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगा उपचार कराना संभव नहीं था। ऐसे में वर्षों तक यह समस्या उसके जीवन का हिस्सा बनी रही और उसका आत्मविश्वास भी प्रभावित होता रहा।

स्कूल स्वास्थ्य परीक्षण में हुई पहचान
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत चिरायु दल ने नियमित स्कूल स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान माड़कम हुंगा की पहचान की। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिकित्सकीय टीम ने उसकी स्थिति का मूल्यांकन किया और तत्काल उसे विशेष उपचार के लिए चयनित किया।
इसके बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रायपुर रेफर किया गया, जिससे समय पर उसका उपचार सुनिश्चित हो सका।
रायपुर में हुई सफल प्लास्टिक सर्जरी
25 जून 2026 को माड़कम हुंगा को रायपुर के एक विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने उसकी सफल प्लास्टिक सर्जरी की।
सर्जरी के बाद उसका स्वास्थ्य तेजी से सुधरा और आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी के बाद 30 जून 2026 को उसे पूर्णतः स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार समय पर किए गए इस उपचार से भविष्य में उसके सामान्य जीवन, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता में सकारात्मक बदलाव आएगा।
उपचार का पूरा खर्च सरकार ने उठाया
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत माड़कम हुंगा के उपचार पर आने वाला पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया। इसमें सर्जरी, सभी आवश्यक जांच, दवाइयां, रायपुर तक आने-जाने की व्यवस्था, रहने और भोजन की सुविधा भी शामिल रही।
इससे परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा और उन्हें गुणवत्तापूर्ण उपचार पूरी तरह निःशुल्क प्राप्त हुआ।
चेहरे पर लौटी मुस्कान, बढ़ा आत्मविश्वास
सफल सर्जरी के बाद माड़कम हुंगा के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब उसे भोजन करने और बोलने में पहले जैसी कठिनाई नहीं होती। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान और बढ़ा हुआ आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि समय पर मिली स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी बच्चे का भविष्य बदल सकती हैं।
परिवार ने भी उपचार से मिली राहत पर खुशी व्यक्त करते हुए शासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार जताया है।
दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक पहुंच रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत कार्यरत चिरायु दल प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के माध्यम से जन्मजात बीमारियों, विकास संबंधी समस्याओं और अन्य गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है।
इस पहल के माध्यम से हजारों बच्चों को समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे उनका शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास बेहतर हो रहा है।
जरूरतमंद बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण
माड़कम हुंगा की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि शासन की स्वास्थ्य योजनाएं केवल उपचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जरूरतमंद बच्चों को नया जीवन, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य देने का कार्य भी कर रही हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संचालित चिरायु दल दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कर बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। यह पहल प्रदेश में समावेशी और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
