कवर्धा, 3 जुलाई 2026। प्रकृति, वन्यजीव और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और जिम्मेदार ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भोरमदेव ईको ट्रेल 2026 का शुभारंभ 4 जुलाई 2026 से किया जा रहा है। वन विभाग की इस विशेष पहल के तहत प्रतिभागियों को भोरमदेव अभ्यारण्य के घने जंगलों, जैव विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों का अनूठा अनुभव मिलेगा।
यह ईको ट्रेल प्रत्येक शनिवार और रविवार को भोरमदेव अभ्यारण्य के करियामा गेट स्थित भोरमदेव ईको कैंप से संचालित होगी। जुलाई माह के बाद भी इसका आयोजन हर सप्ताहांत नियमित रूप से किया जाएगा, जिससे प्रकृति प्रेमियों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को जंगल भ्रमण का अवसर मिलता रहेगा।
प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत का मिलेगा समग्र अनुभव
वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि ईको ट्रेल के दौरान प्रतिभागियों को अनुभवी नेचर गाइड के साथ भोरमदेव के प्राकृतिक वनों का भ्रमण कराया जाएगा। भ्रमण के दौरान वे विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों, औषधीय पौधों, पक्षियों और तितलियों का अवलोकन करेंगे तथा वन्यजीवों की उपस्थिति के प्राकृतिक संकेतों की पहचान करना भी सीखेंगे।

इसके साथ ही प्रतिभागियों को प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और जिम्मेदार ईको-पर्यटन के महत्व से भी परिचित कराया जाएगा। ट्रेल का समापन विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर के भ्रमण के साथ होगा, जिससे प्रतिभागियों को क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का समग्र अनुभव प्राप्त होगा।
सुबह 8 बजे से शुरू होगा पूरा कार्यक्रम
ईको ट्रेल का शुभारंभ सुबह 8 बजे करियामा गेट स्थित भोरमदेव ईको बेस कैंप में प्रतिभागियों की रिपोर्टिंग और स्वागत के साथ होगा। इसके बाद पंजीयन, सुरक्षा संबंधी निर्देश और ट्रेल की जानकारी दी जाएगी।
सुबह 8:30 बजे प्रशिक्षित प्रकृति विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में जंगल ट्रेक शुरू होगा। इस दौरान प्रतिभागी पक्षी एवं तितली अवलोकन, वृक्ष एवं औषधीय पौधों की पहचान, वन्यजीवों के प्राकृतिक चिन्हों की जानकारी और प्राकृतिक वातावरण में फोटोग्राफी का आनंद ले सकेंगे।
स्थानीय व्यंजन और भोरमदेव मंदिर भ्रमण भी होगा आकर्षण
वन भ्रमण के बाद दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक प्रतिभागियों को पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। इसके बाद विश्राम और नदी तट के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए समय निर्धारित किया गया है।
सायं 4 बजे से 5 बजे तक प्रतिभागी ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर एवं उसके विरासत परिसर का भ्रमण करेंगे, जहां उन्हें मंदिर की ऐतिहासिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक विशेषताओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा, QR कोड से करें रजिस्ट्रेशन
वन विभाग ने प्रतिभागियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पंजीयन की व्यवस्था की है। इच्छुक प्रतिभागी भोरमदेव जंगल सफारी के लिए जारी क्यूआर (बारकोड) को स्कैन कर निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करते हुए अपना पंजीयन करा सकते हैं।
अधीक्षक श्रीमती अनिता साहू केशरवानी ने अधिक से अधिक प्रकृति प्रेमियों, विद्यार्थियों, युवाओं और पर्यटकों से इस अनूठी पहल का हिस्सा बनने की अपील की है।
प्रति प्रतिभागी 1,000 रुपये शुल्क, सीटें रहेंगी सीमित
ईको ट्रेल में भाग लेने के लिए प्रति प्रतिभागी 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वन विभाग ने बताया कि सीमित सीटों के कारण इच्छुक लोगों से समय रहते पंजीयन कराने का आग्रह किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य लोगों को प्रकृति के करीब लाना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और भोरमदेव क्षेत्र में जिम्मेदार ईको-पर्यटन को बढ़ावा देना है।
ट्रेकिंग के दौरान साथ रखें जरूरी सामान
वन विभाग ने प्रतिभागियों से ट्रेकिंग के दौरान वैध फोटो पहचान पत्र, आरामदायक ट्रैकिंग परिधान, स्पोर्ट्स शूज़, हल्का बैग, पानी की बोतल, टोपी या कैप, धूप का चश्मा, रेनकोट, आवश्यक व्यक्तिगत दवाइयां तथा इच्छानुसार कैमरा या दूरबीन साथ रखने की सलाह दी है।
इससे प्रतिभागी जंगल भ्रमण का सुरक्षित और बेहतर अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
प्रकृति संरक्षण और ईको-पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
भोरमदेव ईको ट्रेल 2026 केवल एक पर्यटन गतिविधि नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का अभियान भी है। इस पहल के माध्यम से लोगों को जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
वन विभाग का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से भोरमदेव क्षेत्र में जिम्मेदार ईको-पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और प्रकृति के प्रति लोगों की संवेदनशीलता भी बढ़ेगी।
