शव वाहन नहीं मिलने पर ट्रैक्टर में शव ले जाते परिजन
बलरामपुर |
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक बेहद संवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजपुर क्षेत्र में रहने वाले एक पहाड़ी कोरवा परिवार को अपने परिजन के शव को घर तक ले जाने के लिए शव वाहन तक नहीं मिला। मजबूरी में परिजनों को ट्रैक्टर में शव रखकर करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि खराब और दुर्गम रास्तों के कारण यह सफर लगभग चार घंटे में पूरा हुआ।

जानकारी के अनुसार परिवार ने शव वाहन के लिए काफी देर तक इंतजार किया और मदद की गुहार भी लगाई, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।आखिरकार परिजनों ने ट्रैक्टर का सहारा लिया और शव को गांव तक पहुंचाया।यह दृश्य इलाके में चर्चा और नाराजगी का कारण बन गया।
पहाड़ी कोरवा जनजाति को विशेष पिछड़ी जनजाति माना जाता है और इन्हें राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र के रूप में भी जाना जाता है।ऐसे में इस घटना ने दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की मांग की है।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद चिंतामणि महाराज ने व्यवस्था में कमी स्वीकार की।उन्होंने कहा: “यह कमी है, इस पर ऊपर चर्चा करेंगे और जल्द शव वाहन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।”
पहाड़ी कोरवा समुदाय छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों में शामिल है। यह मामला दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
