बस्तर , 10 सितंबर 2026
कोण्डागांव के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले विनायक कोहली ने अपनी नवाचारी शिक्षण पद्धतियों से राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। इंडिया’ज बेस्ट टीचर्स अवार्ड्स 2026 में भूगोल श्रेणी का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने वाले कोहली को देश के सबसे युवा ‘बेस्ट टीचर’ के रूप में पहचान मिली है। उनकी इस उपलब्धि पर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने उनका सम्मान किया।
इस सम्मान के पीछे कोहली का ऐसा शिक्षण मॉडल है, जिसमें किताबों के साथ स्थानीय संस्कृति, कला, अनुभव और गतिविधियों को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है। कोण्डागांव में उन्होंने छत्तीसगढ़ की पहली सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला तैयार की है। इसके अलावा बस्तर आर्ट म्यूजियम कॉर्नर, मैपिंग गतिविधियां, मृदा नमूना संग्रह, रोल-प्ले, युवा संसद और ध्यान सत्र जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को विषयों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
देशभर के 9,500 से अधिक शिक्षकों के बीच हुई चयन प्रक्रिया के तीन चरणों को पार करते हुए विनायक कोहली अंतिम चरण तक पहुंचे। उन्हें दिल्ली बुलाया गया, जहां ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और अन्य विशेषज्ञों के सामने उन्होंने अपनी शिक्षण पद्धतियों का प्रस्तुतिकरण किया। इसी प्रस्तुति के आधार पर उन्हें भूगोल श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया।
कोहली की प्रस्तुति की शुरुआत भी सामान्य तरीके से नहीं हुई। सात वर्षों से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण ले रहे कोहली ने पारंपरिक नमस्कारम मुद्रा के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने शिक्षकों को बताया कि हर शिक्षक के भीतर किसी न किसी कला, कौशल या रुचि की अपनी अलग पहचान होती है। यदि उस प्रतिभा को कक्षा में शिक्षण से जोड़ा जाए तो पढ़ाई बच्चों के लिए अधिक प्रभावी और रोचक बन सकती है।
राष्ट्रीय मंच पर अपनी उपलब्धि के दौरान कोहली ने कोण्डागांव और बस्तर की संस्कृति को भी प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि इस सफलता में यहां के शिल्पकारों, कलाकारों और विद्यार्थियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। बस्तर की मिट्टी, स्थानीय शिल्प और परंपराओं को सामाजिक विज्ञान से जोड़कर उन्होंने शिक्षा को स्थानीय संदर्भों से जोड़ने का प्रयास किया, जिसे राष्ट्रीय मंच पर भी पहचान मिली।
बच्चों की पढ़ाई में मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की बढ़ती निर्भरता को लेकर भी कोहली ने चिंता जताई। उनका कहना है कि कम उम्र में स्क्रीन पर बढ़ता समय बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसके विकल्प के रूप में उन्होंने अनुभव आधारित, हस्त-कौशल आधारित और खिलौना आधारित गतिविधियों को कक्षा में बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान को भी जरूरी बताया। उनके अनुसार शिक्षक को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में भूमिका निभाने वाले मार्गदर्शक के रूप में देखा जाना चाहिए। शिक्षक का सम्मान और कल्याण भी बेहतर शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विनायक कोहली की उपलब्धि के बाद अब उनकी शिक्षण पद्धति को पूरे जिले में विस्तार देने की तैयारी है। कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने जिले के सभी विद्यालयों के प्राचार्यों को अपने-अपने स्कूलों में भूगोल प्रयोगशालाएं विकसित करने की दिशा में काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सामाजिक विज्ञान, भूगोल, इतिहास और कला विषय के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित करने को कहा गया है, जिसमें कोहली अपने अनुभव और नवाचार साझा करेंगे।
सम्मान समारोह में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अविनाश भोई, अपर कलेक्टर अजय उरांव, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे। विनायक कोहली ने अपनी उपलब्धि के लिए वन मंत्री केदार कश्यप, जिला प्रशासन, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोण्डागांव के प्राचार्य और केंद्रीय विद्यालय संगठन के प्रति आभार व्यक्त किया।
कोण्डागांव के एक विद्यालय में शुरू किए गए प्रयोगों से लेकर राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान तक का विनायक कोहली का सफर यह बताता है कि स्थानीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षण पद्धति को साथ लेकर चलने वाला प्रयोग बच्चों की पढ़ाई को नई दिशा दे सकता है। अब जिले के दूसरे स्कूलों में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
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