रायपुर, 07 सितंबर 2026
सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारिता में तथ्यों की पुष्टि और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। एक पत्रकार की पहचान इस बात से नहीं होनी चाहिए कि उसने खबर सबसे पहले दी, बल्कि इस बात से होनी चाहिए कि खबर कितनी सही, तथ्यपरक और जिम्मेदारी के साथ सामने रखी गई। यह बात राज्यपाल रमेन डेका ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
राज्यपाल ने कहा कि सोशल मीडिया पर सूचनाएं तेजी से फैलती हैं, लेकिन वहां मौजूद हर जानकारी सही हो, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में पत्रकारों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। किसी व्यक्ति या घटना से जुड़ी खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूरी जांच जरूरी है, क्योंकि एक समाचार का असर संबंधित व्यक्ति के साथ-साथ पूरे समाज पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है।

इस दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा और नारी सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नाम पर छात्रावास का नामकरण छात्राओं को उनके विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को यहां सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिलेगा, जिससे उनकी उच्च शिक्षा और प्रतिभा विकास को बढ़ावा मिलेगा।

राज्यपाल ने मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि AI के आने से मीडिया और पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में इस तरह का शोध केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों की समझ विकसित करने और उनका जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने के लिए तैयार करने में उपयोगी साबित होगा।
पत्रकारिता की सामाजिक भूमिका पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि लोकतंत्र के महत्वपूर्ण आधार के रूप में मीडिया की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। पत्रकारिता का उद्देश्य केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्याओं और जरूरतों को सामने लाना तथा व्यवस्था में जरूरी सुधार की दिशा में भूमिका निभाना भी है।
उन्होंने कहा कि समाज में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं, लेकिन वे व्यापक पहचान हासिल नहीं कर पाए। पत्रकारों को ऐसे अनसुने नायक-नायिकाओं की कहानियां समाज तक पहुंचानी चाहिए, ताकि उनके काम से दूसरे लोगों को भी प्रेरणा मिल सके। राज्यपाल ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, AI और सोशल मीडिया के दौर में प्रिंट मीडिया ने अपनी विश्वसनीयता कायम रखी है।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके साथ बिताए अवसरों तथा उनसे मिली प्रेरणाओं को साझा किया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कल्याण को प्राथमिकता देने के साथ छात्र संख्या बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने पर भी जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में कम से कम एक हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई। साथ ही संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। संचालन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष मंडावी ने किया, जबकि कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्राध्यापक, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
