रायपुर, 30 अगस्त 2026।
खेती में तकनीक का इस्तेमाल अब ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया रास्ता बन रहा है। ग्राम जुनवानी की हीरामती यादव ने ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाकर अपनी साग-सब्जियों की खेती को आसान और ज्यादा लाभकारी बना लिया है।
देविका महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हीरामती पहले भी सब्जियों की खेती करती थीं, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण उन्हें पानी की कमी के साथ-साथ ज्यादा मेहनत और अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ता था।
जड़ों तक पहुंच रहा पानी, कम हुई मेहनत
कृषि एवं उद्यानिकी विकास योजनाओं के तहत खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगने के बाद हीरामती की खेती का तरीका बदल गया।
ड्रिप सिस्टम के जरिए पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। इससे पानी की बर्बादी कम हुई और सिंचाई में लगने वाली मेहनत और लागत भी घट गई।
अब हीरामती अकेले ही अपने खेत की देखभाल कर लेती हैं। व्यवस्थित सिंचाई की वजह से साग-सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ है, जिसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ा है।
‘अब अकेले पूरा खेत संभल जथे’
हीरामती यादव बताती हैं कि पहले पानी की कमी के कारण खेती करना मुश्किल होता था। ड्रिप सिस्टम लगने के बाद उनकी परेशानी काफी कम हो गई है।
उनके मुताबिक, अब खेती के लिए पहले की तुलना में कम मेहनत करनी पड़ती है और अकेले ही पूरा खेत संभालना आसान हो गया है। उन्होंने शासन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया।
खेती बनी आत्मनिर्भरता का जरिया
हीरामती की कहानी बताती है कि आधुनिक कृषि तकनीक अगर ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचे, तो खेती सिर्फ पारंपरिक आजीविका तक सीमित नहीं रहती। बेहतर सिंचाई व्यवस्था से पानी की बचत, श्रम और लागत में कमी तथा उत्पादन में सुधार—तीनों का फायदा मिल सकता है।
ड्रिप सिंचाई ने हीरामती के खेत को अधिक व्यवस्थित बनाया है और उनकी खेती को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद की है।
कम पानी, कम मेहनत और बेहतर उत्पादन—ड्रिप सिंचाई के जरिए हीरामती ने खेती में आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की है।
