दंतेवाड़ा, 30 अगस्त 2026।
बस्तर के जिस वनांचल में कुछ समय पहले तक धमाकों और दहशत का माहौल था, वहां अब रेडियो पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ सुनाई दे रही है। दंतेवाड़ा के सुदूर गांव छिंदनार में रविवार को ग्रामीण एक साथ जुटे और पूरे देश के साथ प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम की 137वीं कड़ी सुनी।

छिंदनार के लोगों के लिए यह खास मौका था। गांव में पहली बार बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रधानमंत्री को सुनने के लिए एक जगह जुटे। ग्रामीणों में कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया और उन्होंने पूरे ध्यान से प्रधानमंत्री का संदेश सुना।
मंत्री, सांसद और विधायक भी ग्रामीणों के साथ हुए शामिल
‘मन की बात’ कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी भी ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे।

इस दौरान छिंदनार में बदले माहौल की तस्वीर साफ दिखाई दी। जिन इलाकों में कभी नक्सल हिंसा के कारण लोगों के बीच भय का वातावरण रहता था, वहां अब ग्रामीण विकास और देश से जुड़े कार्यक्रमों में उत्साह के साथ भाग लेते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा- ‘मन की बात’ जोड़ती है देश को
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुनने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि ‘मन की बात’ देश को एक सूत्र में जोड़ने का काम करती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नए प्रयोगों और नवाचारों की जानकारी मिलती है। इससे लोगों को अपने क्षेत्र में भी बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलती है।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ समेत देश की संस्कृति, परंपरा, विरासत और समाज में हो रहे सकारात्मक बदलावों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
नक्सलवाद के बाद बदल रहा बस्तर
छिंदनार में ‘मन की बात’ सुनने के लिए ग्रामीणों का एकजुट होना बस्तर में हो रहे बदलाव की बड़ी तस्वीर का हिस्सा माना जा रहा है।
नक्सलवाद के प्रभाव से लंबे समय तक प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम गांवों तक विकास योजनाओं और नागरिक सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। वर्षों से प्रभावित विकास कार्यों को फिर से गति देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
छिंदनार में आज का दृश्य इसी बदलाव का संकेत देता है—जहां कभी धमाकों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब रेडियो पर ‘मन की बात’ की गूंज है।
