रायपुर। छत्तीसगढ़ में पशुपालन विभाग की योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। सूरजपुर जिले के विकासखंड रामानुजनगर के ग्राम अगस्तपुर निवासी हीरालाल सोनवानी इसकी प्रेरक मिसाल हैं। विभाग की कृत्रिम गर्भाधान सेवा और अन्य योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक और लाभकारी डेयरी व्यवसाय में बदल दिया है।
उन्नत नस्ल से बढ़ा दुग्ध उत्पादन
करीब 16 वर्षों से पशुपालन से जुड़े हीरालाल सोनवानी के पास वर्तमान में 4 दुधारू गाय, 3 बछिया और 4 बछड़े हैं। उन्होंने कृष्णपुर पशु चिकित्सीय उपकेंद्र के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान सेवा का लाभ लिया, जिससे उन्हें उन्नत नस्ल के पशु प्राप्त हुए।
बेहतर नस्ल के कारण उनकी गायों की दूध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में वे प्रतिदिन 35 से 40 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उनकी नियमित आय में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है।
विभागीय योजनाओं से मिला व्यवसाय को विस्तार
हीरालाल सोनवानी ने बताया कि पशुपालन विभाग की मादा-वत्स पालन योजना के तहत उन्हें एक बछिया मिली, जिसने उनके पशुधन के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा समय-समय पर दी गई तकनीकी सलाह, टीकाकरण, पोषण संबंधी मार्गदर्शन और प्रजनन सेवाओं के कारण उनका डेयरी व्यवसाय अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बन सका है। उन्नत नस्ल के पशुओं से दूध उत्पादन बढ़ने के साथ पशुओं का स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है।
आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील
हीरालाल सोनवानी ने अन्य पशुपालकों से भी कृत्रिम गर्भाधान जैसी आधुनिक तकनीकों और पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। उनका कहना है कि उन्नत नस्ल के पशुओं का पालन ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी माध्यम है।
ग्रामीण आय बढ़ाने पर विभाग का फोकस
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय पशुधन की नस्ल में सुधार कर दुग्ध उत्पादन बढ़ाना, पशुपालकों की आय में वृद्धि करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। विभाग आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
