रायपुर, 20 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और गौ संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकेगा।
मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशव्यापी ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ किया, पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया तथा गौ विज्ञान परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार प्रदान किए।
1.64 लाख विद्यार्थियों की सहभागिता को बताया नई पीढ़ी की सकारात्मक सोच का संकेत
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण समृद्धि की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में गाय के वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की समझ विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित गौ विज्ञान परीक्षा एक अत्यंत सराहनीय पहल है।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि इस वर्ष प्रदेशभर के स्कूलों और महाविद्यालयों से 1 लाख 64 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक हो रही है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उन्हें समाज में गौ संरक्षण के प्रभावी दूत बनने का आह्वान किया।
‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान से बढ़ेगी जनभागीदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौ संरक्षण को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान की शुरुआत की गई है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को गौसेवा एवं गौ संरक्षण के प्रति जागरूक करें तथा इस अभियान को घर-घर तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
न्योता भोज जैसी पहल से मजबूत हो रहा समाज और विद्यालय का संबंध
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में नए शिक्षा सत्र के साथ शाला प्रवेश उत्सव और न्योता भोज जैसी अभिनव पहलें भी संचालित की जा रही हैं। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या माता-पिता की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर विद्यालयों में बच्चों के साथ भोजन कराने की परंपरा समाज और विद्यालय के बीच आत्मीय संबंधों को मजबूत कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से बच्चों को अतिरिक्त पोषण मिलने के साथ-साथ समाज की शिक्षा व्यवस्था में सहभागिता भी बढ़ रही है, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है।
गोबर आधारित उत्पाद बन रहे स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय से प्राप्त दूध, दही, गोबर और गोमूत्र सहित प्रत्येक उत्पाद मानव जीवन के लिए उपयोगी है। आज गोबर से अनेक प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करेगी, ताकि गौपालन केवल धार्मिक आस्था का विषय न रहकर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम भी बन सके।
गौ संरक्षण के लिए सरकार ने बढ़ाई सहायता, सुरभि गौधाम योजना को मिलेगा विस्तार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। प्रदेश की पंजीकृत गौशालाओं में प्रति गाय चारे के लिए दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि सुरभि गौधाम योजना के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौधाम विकसित किए जा रहे हैं, जहां पशु चिकित्सकों, चरवाहों तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि गौवंश का बेहतर संरक्षण और संवर्धन हो सके।
बस्तर में डेयरी विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद कम होने के बाद अब विकास का नया दौर शुरू हुआ है। कृषि और पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से देसी गाय उपलब्ध कराने की योजना प्रारंभ की गई है।
उन्होंने बताया कि इस योजना से प्रदेश में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब सरकार इस योजना का लाभ अन्य इच्छुक पशुपालकों, विशेषकर यादव समाज के लोगों तक भी पहुंचाने पर विचार कर रही है, जिससे डेयरी क्षेत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी।
गौ सेवा से भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़ रही नई पीढ़ी
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि गौ विज्ञान परीक्षा के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों ने गौमाता के महत्व को समझा है। यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है।
वहीं, गौ सेवा गतिविधि के अखिल भारतीय संयोजक श्री अजीत महापात्र ने कहा कि गौ विज्ञान परीक्षा विद्यार्थियों को गाय के वैज्ञानिक महत्व और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ रही है। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो रहा है।
गौ विज्ञान परीक्षा के मेधावियों को किया सम्मानित
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गौ विज्ञान परीक्षा के तीनों वर्गों के विजेताओं को सम्मानित किया। प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 51 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 31 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह परीक्षा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
गौ संरक्षण, पर्यावरण और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा देने का संकल्प
गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह के माध्यम से राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि गौ संरक्षण को केवल धार्मिक विषय तक सीमित न रखकर उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान, सुरभि गौधाम योजना, डेयरी विकास और गोबर आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने जैसी पहलें प्रदेश में गौपालन को नई दिशा देने के साथ-साथ जनभागीदारी आधारित गौ संरक्षण अभियान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
