रायपुर, 3 जुलाई 2026। किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और गांवों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार सहकारिता को विकास का प्रमुख आधार बना रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सहकारिता किसानों, वनवासियों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय ने देश में “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को नई दिशा दी है और छत्तीसगढ़ में भी इसका व्यापक लाभ लोगों तक पहुंच रहा है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार से सम्मानित किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

162 करोड़ की प्रोत्साहन राशि से लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा लाभ
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि वितरण का शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस राशि से लाखों परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
1352 नई सहकारी समितियों से गांव-गांव तक पहुंचा सहकारिता का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे। इसी दिशा में पिछले दो वर्षों में 1,352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि इन समितियों के माध्यम से किसानों को कृषि ऋण, उर्वरक, बीज, विपणन तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हो रही हैं। इससे गांवों में सहकारिता का दायरा तेजी से बढ़ा है और ग्रामीण विकास को नई गति मिली है।

पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और वनोपज को भी मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार केवल कृषि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता मॉडल को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को आय का प्रमुख स्रोत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
अब किसानों को मिल रहा बिना ब्याज ऋण
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय किसानों को खेती के लिए 16 से 18 प्रतिशत ब्याज पर ऋण लेना पड़ता था, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता था। लेकिन अब सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया है। इससे किसानों को समय पर वित्तीय सहायता मिल रही है और खेती की लागत का दबाव कम हुआ है।
ऑनलाइन पोर्टल से किसानों को मिलेगी पारदर्शी सुविधा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।
इस डिजिटल पहल से किसानों को विभागीय सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गति आएगी।
सहकारिता सप्ताह में होंगे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम
सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि 29 जून से 6 जुलाई तक पूरे प्रदेश में सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी स्टॉलों का किया अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), नाफेड, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के कार्यों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण भी किया। इसके अलावा उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण प्रदान किए।
सहकारिता बनेगी विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत आधारशिला
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जिस प्रकार केंद्र और राज्य सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विशेषज्ञों के विचार-विमर्श से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजित करने, महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाने, वनवासियों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में सहकारिता की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होगी। राज्य सरकार “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
