छत्तीसगढ़ में 50 परिवारों ने अपनाए सनातन मूल्य, शिवरीनारायण में भावुक दृश्य

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जगद्गुरु Jagadguru Rambhadracharya के सानिध्य में हुआ कार्यक्रम, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर दिया गया जोर…………

Shivrinarayan।


छत्तीसगढ़ के पवित्र धार्मिक स्थल शिवरीनारायण स्थित “राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुआ धाम” में आयोजित “शबरी की निष्ठा” कथा के दौरान एक विशेष आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 50 परिवारों ने पारंपरिक विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ सनातन परंपरा से पुनः जुड़ने का संकल्प लिया।

यह आयोजन परम पूज्य Jagadguru Rambhadracharya के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत और समाजसेवी शामिल हुए।

🟢 शबरी माता की भूमि पर हुआ आयोजन

शिवरीनारायण को माता शबरी की पावन भूमि के रूप में जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यही वह स्थान है जहां माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेमपूर्वक बेर अर्पित किए थे।

आयोजकों ने कहा कि इस स्थल पर आयोजित कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक चेतना और अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने का प्रयास है।

🟢 प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने किया स्वागत

कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतीय घरवापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने धर्मांतरित परिवारों का चरण पखारकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया।

आयोजकों के अनुसार यह क्षण भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा, जिसने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया।

🟢 किन संस्थाओं ने किया आयोजन

इस कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त रूप से:

  • राम मिलेंगे आश्रम आयोजन समिति
  • धर्म जागरण समन्वय विभाग
  • दिलीप सिंह जूदेव फाउंडेशन
  • सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन

द्वारा किया गया।

🟢 कई संत और समाजसेवी रहे मौजूद

कार्यक्रम में कई संत, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से:

  • डॉ. अशोक चतुर्वेदी
  • सर्वेश्वर दास जी महाराज
  • राजकुमार चंद्रा
  • श्रीमती अंजू ग़बेल

मौजूद रहे।

आयोजकों का कहना है कि यह पहल सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सनातन मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उनके अनुसार इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी में सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव को मजबूत करेंगे।

🔵 मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • शिवरीनारायण में आयोजित हुई “शबरी की निष्ठा” कथा
  • 50 परिवार सनातन परंपरा से पुनः जुड़े
  • जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी के सानिध्य में हुआ आयोजन
  • सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर जोर
  • बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु रहे मौजूद

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