रायपुर | 3 अगस्त 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत नगपुरा जल संरक्षण का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है। यहां करीब 2 हजार जल अवशोषण ट्रेंच तैयार किए गए हैं, जिनसे वर्षा जल का संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण प्रभावी ढंग से हो रहा है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के तहत विकसित आंवला और करौंदा बगीचे में वैज्ञानिक पद्धति से ट्रेंच बनाए गए। पहले बारिश का अधिकांश पानी बह जाता था, लेकिन अब वही पानी जमीन में समाहित होकर मिट्टी की नमी और भू-जल स्तर बढ़ाने में मदद कर रहा है।
तकनीकी सहायक दीप्ति सिंह के अनुसार, प्रत्येक ट्रेंच की क्षमता लगभग 2 घन मीटर है। इस आधार पर एक अच्छी बारिश में लगभग 4 हजार घन मीटर पानी का संरक्षण संभव है। यदि पूरे मानसून में ट्रेंच कई बार भरते हैं, तो करीब 1.20 लाख घन मीटर वर्षा जल का भू-जल पुनर्भरण किया जा सकता है।
यह कार्य मनरेगा के तहत किया गया, जिससे बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार मिला। इससे ग्रामीणों की आय बढ़ने के साथ जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी भी मजबूत हुई है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने कहा कि नगपुरा का यह मॉडल राज्य की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रमुख बिंदु
- 2,000 जल अवशोषण ट्रेंच का निर्माण
- एक बारिश में 4,000 घन मीटर जल संरक्षण क्षमता
- पूरे मानसून में 1.20 लाख घन मीटर तक भू-जल पुनर्भरण का अनुमान
- मनरेगा से स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार
- जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका का सफल मॉडल
