रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ प्रदेश की महिलाओं के लिए प्रेरणा, आत्मनिर्भरता और आजीविका का सशक्त माध्यम बन चुका है। इस कार्यक्रम के जरिए सफल महिलाओं की कहानियां हजारों अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने यह बात राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘दीदी के गोठ’ वार्षिकोत्सव-2026 एवं संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
कॉफी टेबल बुक, पत्रिका और पुस्तक का किया विमोचन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम के दौरान—
- ‘दीदी के गोठ’ कॉफी टेबल बुक
- ‘बिहान वाणी’ त्रैमासिक पत्रिका
- ‘मोर गांव मोर पानी’ पुस्तक
का विमोचन किया।
उन्होंने अपनी सफलता की कहानी साझा करने वाली बिहान समूह की दीदियों को सम्मानित किया तथा ‘दीदी के गोठ’ के 12 एपिसोड पर आधारित प्रदर्शनी और फोटो गैलरी का अवलोकन कर महिलाओं के नवाचारों एवं आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली।
एक वर्ष में पूरे हुए 12 एपिसोड
मुख्यमंत्री ने बताया कि 31 अगस्त 2025 से शुरू हुए ‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम ने एक वर्ष का सफल सफर पूरा कर लिया है।
अब तक—
- 12 एपिसोड प्रसारित किए जा चुके हैं।
- प्रत्येक माह के दूसरे गुरुवार को कार्यक्रम का प्रसारण होता है।
- प्रदेश के 25 जिलों की 38 महिलाएं अपनी स्थानीय बोली में सफलता और नवाचार की कहानियां साझा कर चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता है कि एक महिला की कहानी हजारों अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
लखपति दीदी विद्या निषाद की सफलता की कहानी की सराहना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने दुर्ग जिले से वर्चुअल माध्यम से जुड़ीं लखपति दीदी विद्या निषाद से संवाद किया।
विद्या निषाद ने बताया कि—
- कोरोना काल में पति के निधन के बाद उन्होंने बिहान समूह से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
- कपड़े एवं फैंसी स्टोर का व्यवसाय शुरू किया।
- आज वे प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं—
- ड्रोन दीदी
- राजमिस्त्री
- ऑर्गेनिक खेती
- पशुपालन
- कृषि सखी
- पशु सखी
- कैटरिंग एवं अन्य स्वरोजगार गतिविधियों
के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि आज की लखपति दीदियां भविष्य में करोड़पति दीदियां बनकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार की कई पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि—
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश को 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है।
- इनमें से 11 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं।
- प्रतिदिन लगभग 1,600 आवासों का निर्माण किया जा रहा है।
- महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 70 लाख महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है।
- अब तक 28 किश्तों के माध्यम से करीब 18 हजार करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में भेजे जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और बिजली बिल राहत योजना का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 शुरू की गई है, जहां नागरिक विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि—
- शिकायतों के समाधान के लिए लगभग 8,000 अधिकारी कार्य कर रहे हैं।
- मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के तहत दो वर्षों से बकाया उपभोक्ताओं को सरचार्ज में राहत दी जा रही है।
- अब तक 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि माफ की जा चुकी है।
’36 कला’ ब्रांड से मिलेगा स्व-सहायता समूहों को राष्ट्रीय बाजार
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘दीदी के गोठ’ महिलाओं के लिए ज्ञान, नवाचार और प्रेरणा का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
उन्होंने बताया कि—
- स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए ’36 कला’ ब्रांड विकसित किया गया है।
- समूहों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
- आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिलाएं बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।
महिला सशक्तिकरण को मिलेगा और बढ़ावा
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बन रही हैं।
वहीं, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि ‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम महिलाओं तक नवाचार, स्वरोजगार और सफलता की प्रेरणादायी कहानियां पहुंचाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
