रायपुर, 01 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और युवाओं को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती, प्राचार्यों की पदोन्नति, अतिथि प्राध्यापकों की सेवा शर्तों में सुधार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के विस्तार तथा कॉलेजों में अंग्रेजी संप्रेषण पाठ्यक्रम शुरू करने सहित कई अहम फैसलों पर मुहर लगी।
बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सभी लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण किया जाए तथा भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया होगी शुरू
बैठक का सबसे बड़ा निर्णय प्रदेश के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में 700 रिक्त सहायक प्राध्यापक पदों पर सीधी भर्ती शुरू करने का रहा।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। साथ ही विभाग के अन्य रिक्त पदों को भरने के लिए भी शासन को शीघ्र नया प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के माध्यम से होने वाली प्राध्यापकों की भर्ती के दस्तावेज सत्यापन कार्य को भी युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।
31 जुलाई तक सभी स्नातक कॉलेजों को मिलेंगे नियमित प्राचार्य
उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 31 जुलाई 2026 तक स्नातक महाविद्यालयों में प्राचार्यों की पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
उन्होंने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र में प्रदेश का कोई भी स्नातक महाविद्यालय नियमित प्राचार्य के बिना नहीं रहना चाहिए। सरकार की प्राथमिकता शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।
प्राध्यापकों और कर्मचारियों के लिए बड़े फैसले
बैठक में प्राध्यापकों और विभागीय कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
- वर्ष 2019 से पहले के लंबित सहायक प्राध्यापकों को 1990 के नियमों के तहत पदोन्नति का लाभ मिलेगा।
- सहायक प्राध्यापकों की वरिष्ठ एवं प्रवर श्रेणी वेतनमान सूची जल्द जारी की जाएगी।
- अतिथि प्राध्यापकों की सेवा शर्तों में सुधार के लिए गठित समिति की रिपोर्ट पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।
- सहायक ग्रेड-3 एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से पारदर्शी तरीके से की जाएगी।
ग्रामीण और आदिवासी छात्रों के लिए शुरू होगा ’90 घंटे, 90 दिन’ अंग्रेजी कोर्स
राज्य सरकार ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में “90 घंटे, 90 दिन” अंग्रेजी संप्रेषण कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।
इस विशेष पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के अंग्रेजी संचार कौशल को बेहतर बनाना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और रोजगार के अवसरों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना है।
वित्तीय अनियमितताओं पर सख्ती
उच्च शिक्षा मंत्री ने विभाग में वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी महाविद्यालय को बजट जारी करने से पहले प्रशासनिक स्वीकृति अनिवार्य होगी। साथ ही नए महाविद्यालयों के विकास के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जाएंगे ताकि संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो सके।
पीजी पाठ्यक्रमों में भी लागू होगी नई शिक्षा नीति
बैठक में बताया गया कि चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के बाद अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों को भी नई व्यवस्था के तहत संचालित करने की तैयारी की जा रही है।
एनईपी के तहत पांचवें और छठे सेमेस्टर के लिए केंद्रीय अध्ययन मंडल की सूची को अंतिम रूप देकर स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए नए कदम
उच्च शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से अपर संचालक और प्राचार्य के पदों को अलग-अलग रखने का निर्णय लिया है।
इसके अलावा महाविद्यालयों के प्राचार्यों के कार्यकाल का ऑडिट करने के लिए लेखा उत्तीर्ण कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी, जिससे लंबित ऑडिट और जांच संबंधी मामलों का शीघ्र निपटारा हो सके।
उच्च शिक्षा को आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में पहल
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख बनाना है।
700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती, प्राचार्यों की पदोन्नति, अंग्रेजी संप्रेषण कार्यक्रम, अतिथि प्राध्यापकों के हितों की सुरक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विस्तार जैसे निर्णय छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
